भारत में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या कोई लड़का या लड़की अपने परिवार की अनुमति के बिना शादी कर सकता है। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर Supreme Court of India ने एक अहम फैसला दिया है। यह मामला Laxmibai Chandaragi vs State of Karnataka (2021) से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सर्वोच्च बताया।
मामले की जानकारी – यह मामला Laxmibai Chandaragi vs State of Karnataka (2021) से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सर्वोपरि बताया।
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया मूल अधिकार क्षेत्र – रिट याचिका (आपराधिक) संख्या 359/2020
लक्ष्मीबाई चंदरागी बी एवं अन्य ………… याचिकाकर्ता
बनाम
कर्नाटक राज्य एवं अन्य …………………….. प्रतिवादी
मामला क्या था ? -इस केस में एक लड़की, लक्ष्मीबाई, अपने घर से चली गई। उसके पिता ने पुलिस में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
जांच के दौरान यह सामने आया कि वह अपने दोस्त संतोष यादव के संपर्क में थी और उसने अपनी मर्जी से घर छोड़कर उससे शादी कर ली थी।लड़की ने अपने माता-पिता को व्हाट्सएप के जरिए शादी का प्रमाण भी भेज दिया था। इसके बावजूद पुलिस ने मामला बंद नहीं किया और उसे बार-बार थाने आने के लिए कहा। इतना ही नहीं, पुलिस ने यह भी कहा कि अगर वह नहीं आई तो लड़के के खिलाफ किडनैपिंग का केस दर्ज कर दिया जाएगा। लड़की ने बताया कि उसे अपने परिवार से खतरा है, इसलिए वह वापस नहीं आ सकती। इसके बाद दोनों ने Supreme Court का सहारा लिया।
Supreme Court का फैसला
Supreme Court ने इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण बातें कही:
1. बालिग को अपनी पसंद से शादी का अधिकार
कोर्ट ने साफ कहा कि अगर दो व्यक्ति बालिग हैं, तो उन्हें अपनी मर्जी से शादी करने का पूरा अधिकार है।
2. परिवार की अनुमति जरूरी नहीं
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शादी के लिए माता-पिता या समाज की अनुमति जरूरी नहीं है।
3. Article 21 के तहत अधिकार
अपनी पसंद से शादी करना व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा का हिस्सा है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित है।
4. पुलिस का व्यवहार गलत
कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई और कहा कि जब लड़की सुरक्षित थी, तो उसे परेशान करना गलत था।
5. FIR को रद्द किया गया
कोर्ट ने FIR को पूरी तरह से निरस्त (quash) कर दिया।
आम जनता के लिए क्या मतलब है?
आम जनता के लिए क्या मतलब है? अगर आप 18+ हैं: आप अपनी पसंद से शादी कर सकते हैं आपको किसी की अनुमति की जरूरत नहीं अगर परिवार विरोध करे: आप कोर्ट से सुरक्षा मांग सकते हैं पुलिस क्या नहीं कर सकती: जबरदस्ती थाने बुलाना झूठे केस की धमकी देना
(कानूनी समझ)1

निष्कर्ष – इस फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा कि “Right to Choose” यानी अपनी पसंद का चुनाव करना, व्यक्ति की गरिमा का हिस्सा है। कोर्ट ने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि शादी व्यक्ति की निजी जिंदगी का हिस्सा है और इसमें बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
इस केस में Supreme Court ने एक मजबूत संदेश दिया है कि हर बालिग व्यक्ति को अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने का अधिकार है। “शादी में सबसे महत्वपूर्ण है व्यक्ति की अपनी इच्छा, न कि समाज या परिवार की अनुमति।”
