आज के समय में रेप और POCSO से जुड़े मामलों में कोर्ट के फैसले काफी चर्चा में रहते हैं। हाल ही में Chhattisgarh High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें कोर्ट ने कहा कि यदि लड़की बालिग हो और संबंध आपसी सहमति से बने हों, तो केवल आरोप के आधार पर रेप का अपराध सिद्ध नहीं माना जा सकता।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कोर्ट ने उम्र साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य की आवश्यकता पर जोर दिया है।
केस का शीर्षक (Case Title)
तरुण सेन बनाम छत्तीसगढ़ राज्य
न्यायालय का नाम (Court Name)
Chhattisgarh High Court
3. केस नंबर (Case Number)
क्रिमिनल अपील क्रमांक 1806/2019
4. निर्णय की तारीख (Date of Judgment)
04 अप्रैल 2025
CG High Court Judgment 2025: पूरा मामला क्या था?
पीड़िता के पिता ने 12 जुलाई 2018 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनकी बेटी घर से यह कहकर निकली थी कि वह अपनी दादी के घर जा रही है, लेकिन वापस नहीं लौटी। बाद में जानकारी मिली कि लड़की आरोपी तरुण सेन के साथ गई थी। इसके बाद पुलिस ने लड़की को आरोपी के साथ बरामद किया और आरोपी के खिलाफ अपहरण, रेप और POCSO Act के तहत मामला दर्ज किया गया।

ट्रायल कोर्ट का फैसला
विशेष न्यायालय (POCSO Court) ने आरोपी को दोषी मानते हुए: IPC धारा 376(2)(n) POCSO Act धारा 6 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
अपीलकर्ता (आरोपी) की दलील
आरोपी पक्ष के वकील ने हाईकोर्ट में कहा कि: लड़की बालिग थी। अभियोजन पक्ष लड़की की उम्र साबित नहीं कर पाया। केवल स्कूल रिकॉर्ड पर्याप्त नहीं है। Ossification Test नहीं कराया गया। लड़की अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी। दोनों के बीच प्रेम संबंध था।
प्रतिवादी (राज्य) की दलील
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि: लड़की घटना के समय नाबालिग थी। आरोपी ने नाबालिग लड़की के साथ संबंध बनाए। इसलिए आरोपी को सजा मिलना सही था।
हाईकोर्ट ने क्या पाया ?
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और गवाहों के बयान का गहराई से परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि: लड़की की उम्र साबित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किया गया। स्कूल रिकॉर्ड का लेखक कोर्ट में पेश नहीं हुआ। मेडिकल उम्र परीक्षण (Ossification Test) भी नहीं कराया गया।
पीड़िता के बयान में क्या कहा गया?
पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि: वह आरोपी से फोन पर बात करती थी। उसने खुद आरोपी से कहा था कि वह उसे अपने साथ ले जाए। वह अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी। दोनों होटल में साथ रहे और संबंध बनाए।
मेडिकल रिपोर्ट में क्या मिला ?
डॉक्टर ने बताया कि: शरीर पर किसी प्रकार की चोट नहीं थी। पीड़िता के गुप्तांगों पर कोई बाहरी या अंदरूनी चोट नहीं मिली। पीड़िता शारीरिक संबंध बनाने की अभ्यस्त थी।
हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय
हाईकोर्ट ने कहा कि: अभियोजन पक्ष लड़की को नाबालिग साबित नहीं कर पाया। संबंध सहमति से बने थे। मामला प्रेम संबंध और Elopement (सहमति से साथ जाने) का प्रतीत होता है। आरोपी के खिलाफ रेप और POCSO का अपराध सिद्ध नहीं होता।
इसके बाद हाईकोर्ट ने:
ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया
आरोपी को दोषमुक्त कर दिया
जेल से रिहा करने का आदेश दिया
इस फैसले से क्या सीख मिलती है ?
1. केवल आरोप पर्याप्त नहीं
कोर्ट में मजबूत साक्ष्य जरूरी होते हैं।
2. उम्र साबित करना बेहद महत्वपूर्ण
सिर्फ स्कूल रिकॉर्ड पर्याप्त नहीं माना जाएगा।
3. सहमति का कानूनी महत्व
यदि संबंध सहमति से बने हों, तो कोर्ट परिस्थितियों को देखता है।
4. POCSO मामलों में भी ठोस प्रमाण आवश्यक
कानून हर मामले में साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देता है।
निष्कर्ष
Chhattisgarh High Court का यह फैसला भारतीय कानून में “सहमति”, “उम्र निर्धारण” और “साक्ष्यों की अहमियत” को स्पष्ट करता है। कोर्ट ने कहा कि बिना मजबूत प्रमाण के किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी उदाहरण माना जा सकता है।
