किराया जमा न करने पर क्या Tenant की Defence Strike Off हो जाएगी? Supreme Court का बड़ा फैसला 2026

किराया जमा न करने पर क्या तुरंत Tenant की Defence Strike Off हो जाएगी? Supreme Court का महत्वपूर्ण फैसला

1. Case Title

Dharmendra Kalra & Others v. Kulvinder Singh Bhatia

2. Court Name

Supreme Court of India

3. Case Number

Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 7116 of 2025

4. Date of Judgment

15 May 2026

5. Facts of the Case (मामले के तथ्य)

कानपुर नगर स्थित एक व्यावसायिक भवन के मालिकों (Dharmendra Kalra एवं अन्य) ने अपने किरायेदार Kulvinder Singh Bhatia के खिलाफ बेदखली और बकाया किराया वसूली का मुकदमा दायर किया।

मकान मालिकों का आरोप था कि सितंबर 2020 में किराया बढ़ाकर ₹25,000 प्रतिमाह कर दिया गया था। किरायेदार ने सितंबर और अक्टूबर 2020 का किराया तो दिया, लेकिन उसके बाद नवंबर 2020 से किराया देना बंद कर दिया।

बकाया किराया न मिलने पर मकान मालिकों ने कानूनी नोटिस भेजकर किरायेदारी समाप्त कर दी और बाद में किराया वसूली तथा बेदखली का मुकदमा दायर कर दिया।

मुकदमे के दौरान मकान मालिकों ने Order XV Rule 5 CPC के तहत आवेदन देकर कहा कि किरायेदार ने निर्धारित समय में किराया जमा नहीं किया है, इसलिए उसकी defence strike off कर दी जाए।

ट्रायल कोर्ट ने मकान मालिकों की बात मानते हुए किरायेदार की defence strike off कर दी।

6. High Court ने क्या कहा?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।

हाईकोर्ट ने माना कि किरायेदार को एक और अवसर दिया जाना चाहिए और उसे निर्धारित समय में किराया जमा करने का निर्देश दिया।

बाद में किरायेदार समय पर राशि जमा नहीं कर पाया और समय बढ़ाने की मांग की। हाईकोर्ट ने उसकी देरी को माफ करते हुए समय बढ़ा दिया।

7. Supreme Court ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Order XV Rule 5 CPC के तहत defence strike off करना एक गंभीर और दंडात्मक (penal) कार्रवाई है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

– Defence strike off करना कोई स्वचालित (automatic) प्रक्रिया नहीं है।
– केवल किराया जमा करने में देरी होने से हर मामले में defence समाप्त नहीं की जा सकती।
– न्यायालय को यह देखना होगा कि देरी जानबूझकर (wilful default) की गई थी या उसके पीछे कोई उचित कारण था।
– “First Date of Hearing” का सही निर्धारण आवश्यक है।
– प्रक्रिया संबंधी कानून (Procedural Law) न्याय देने के लिए हैं, न्याय से वंचित करने के लिए नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मामले के महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया, जबकि हाईकोर्ट ने भी अपने पूर्व आदेश और बाद में दी गई राहत के बीच उचित संतुलन नहीं बनाया।

8. Final Decision

सुप्रीम कोर्ट ने:

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 ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों के आदेश रद्द कर दिए।

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 मामला पुनः ट्रायल कोर्ट को भेज दिया (Remand)।

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 ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि:

1. First Date of Hearing निर्धारित करे।
2. जांच करे कि Order XV Rule 5 CPC का पर्याप्त पालन हुआ था या नहीं।
3. यह तय करे कि किरायेदार की गलती जानबूझकर थी या bona fide।
4. दोनों पक्षों को सुनकर नया और कारणयुक्त आदेश पारित करे।

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 ट्रायल कोर्ट को 6 महीने के भीतर मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया गया।

9. आम लोगों के लिए क्या मतलब?

यह फैसला मकान मालिक और किरायेदार दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

किरायेदारों के लिए

– किराया जमा करने में देरी होने पर हर बार defence समाप्त नहीं होगी।
– यदि देरी के पीछे उचित कारण है तो अदालत राहत दे सकती है।
– अदालत को पूरे मामले की परिस्थितियों पर विचार करना होगा।

मकान मालिकों के लिए

– किराया न देने वाले किरायेदार के खिलाफ Order XV Rule 5 CPC का उपयोग किया जा सकता है।
– लेकिन defence strike off कराने के लिए केवल तकनीकी चूक पर्याप्त नहीं होगी।
– यह दिखाना आवश्यक होगा कि किरायेदार का व्यवहार जानबूझकर और लगातार लापरवाही वाला था।

कानूनी सिद्धांत

Defence Strike Off अंतिम उपाय (Last Resort) है, पहला उपाय नहीं।

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